लोग जेनेरेशन गैप की बात करते करते हैं । मैंने भी देखा है और महसूस किया है कितना कुछ बदल गया है
पहले लोग जीते ही नहीं थे बल्कि जीवन का पूरा मज़ा भी लेते है अब लोगों को जीने की कोशिश में बस मरते देखा है
पहले लोगो के पास जीने का सामान तो उतना नही था पर ज़िन्दगी भरपूर थी अब जीने के सारे साधन तो जुटा लिए है पर शायद ज़िन्दगी कँही खो सी गयी है
पहले के लोग जैसे भी थे सच्चे थे अब ऊपर से लेकर नीचे तक अन्दर से लेकर बाहर तक सिर्फ दिखावा और झूठ ।
पहले सब अपने से लगते थे और अब अपने भी पराये से लगते है आज लोगों की खुशी भी झूठी लगती है और उनका दुख भी नकली लगता है
कभी कभी मन करता है कि फिर से उन्ही दिनों में लौट चले अपने दादा-दादी, नाना-नानी के टाइम पर जँहा ज़िन्दगी जीने लायक थी जीने का ढोंग नही था बड़ी बड़ी खुशियां छोटे छोटे लम्हों में बिखरीं रहतीं थीं पर वक्त में बस यही खराबी है कि ये पीछे नही लौटता सिर्फ यादें छोड़ जाता है
दो पल ना निकाल पाये कभी ज़िन्दगी के सवाल पर
उम्र गुजर गई सारी बस पैसे के हिसाब में
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