ज़िन्दगी तो बेवजह ही खूबसूरत होती है
खूबसूरती की वजह तो इसकी सुन्दरता नष्ट कर देती है
आप वजह ढूंढते रहते है इसे खूबसूरत बनाने का और ये और भी भद्दी होती चली जाती है
देखा है कभी छोटे बच्चों को
बेवजह ही खुश रहते हैं , जिंदगी से भरे हुए
पर हम उन पर भी वही अपना पागलपन थोपते रहते है
उन्हें खुशी और सफल बनाने का सस्ता या कहिये सड़ा हुआ ज्ञान देते रहते हैं
कभी देखा है आपका फार्मूला कितने लोगों को सुकून की जिंदगी दे पाया है ?
अपनों के साथ भी इंसान खुद को अकेला महसूस करता है
सब कुछ है और अपने अंदर झाँक कर देखिये तो कुछ नजर नहीं आता
कुछ कमी सी महसूस नहीं होती?
थोड़ा समय निकाल कर पुछिये खुद से
ये सफलता के पीछे भागते-भागते आप खुद से कितने दूर हो गए हैं ?
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