जाने क्यू कैसे मैं आज लिख रही हूँ,
वो तुमसे अपनी पहली मुलाकात लिख रही हूँ
कुछ भूल गए कु छ याद रहा
मैं फिर से आज वही सारी बात लिख रही हूँ
जो थे, हैं और शायद हमेशा रहेगे
वो अनकहे अधूरे एहसास लिख रही हूं
जो गुजर गया वो कभी लौट कर नही आता
उन गुजरे हुए लम्हो का मैं अब हिसाब लिख रही हूँ
कुछ तुमको कुछ खुद को मैं आज लिख रही हूँ
जो कभी भी भूल कर भूलाया नही जाता
अपनी दोस्ती का वो जज़्बात लिख रही हु
नसीब हो तुम्हे मेरे हिस्से की भी हर खुशी
पता नही क्यूँ ये फरियाद लिख रही हूँ।
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