सोमवार, 27 अप्रैल 2020

मैं ऐसी ही हूँ

क्यों अक्सर ऐसा लगता है मुझको
मैं जो कर रही हूं वो क्यों कर रही हूं
बड़ा अनजाना लगता है सब कुछ यँहा पर
किस ओर मैं ये सफर कर रही हूं
क्या मैं सही को गलत कर रही हु
या मैं गलत से उलट कर रही हूं
या छोड़ सब गलत और सही को
जो दिल में है
बस सबको नजर कर रही हूं
कुछ गुस्सा है और कुछ गम है शायद
कुछ अपने गैर हुए जा रहे हैं
और कुछ गैरों को अपना रही हु
नही कोई कहने को अपना यँहा पर
मैं हर दर्द को एक नगमा बना रही हूं
खुश हूं दुखी हूं जो कुछ भी हु मै
खुद को बस वैसे ही अपना रही हूं

गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

कभी खुशी कभी गम

कभी खुशी तो कभी टूटा हुआ ख्वाब है जिंदगी
कांटो में उलझा एक गुलाब है जिंदगी

तमाम कोशिशों के बावजूद
जो किसी के ना समझ मे आये
बस एक ऐसा ही किताब है जिंदगी

कँहा कोई ऊबर पता है इसके नशे से
कुछ ऐसा मदहोश करने वाला शराब है ज़िन्दगी

सारी जद्दोजहद है जीने की यँहा
और फिर भी लोग कहते है खराब है जिंदगी

रविवार, 5 अप्रैल 2020

अजनबी सी ज़िन्दगी

बड़ी अजीब सी है ज़िन्दगी
हर कदम पर साथ
पर फिर भी लगती है बड़ी अजनबी
यूं तो कुछ भी नही है मसअले
फिर भी ये कभी सुलझती नहीं
उलझी हुई है इस क़दर
कि सब सही और कुछ भी नही
अनबन सी है कुछ इस तरह
ना मैं उसे समझ सकी
न वो मुझे समझ सकी

मंगलवार, 31 मार्च 2020

कुछ यादें कभी पुरानी नहीं होतीं

कुछ यादें, कुछ बातें
कभी पुरानी नही होती
कुछ अहसास, कुछ मुलाकातें
कभी पुरानी नहीं होतीं

कुछ लम्हें गुजर भी गुजरा नही करतें
क्योंकि उनकी कशिश
कभी पुरानी नहीं होतीं

निकल जाती है उम्र
यूं ही पलक झपकते
पर कुछ लम्हों को
जीने की ख्वाहिश
कभी पुरानी नहीं होतीं

हा, वक़्त की धूल से
धुंधला जाता है सबकुछ
पर दिल के किसी कोने में इक तस्वीर
कभी पुरानी नहीं होती

सोमवार, 30 मार्च 2020

खुद में खुद की तलाश

कुछ खुशी की बात कर
कुछ ज़िन्दगी की बात कर

क्या ढूँढता है बेवजह
कभी खुद की भी तो तलाश कर

खुद में ही खुदा का नूर है
कभी इसका भी एहसास कर

कब तक खुद को सताएगा
कब तक भटकता जायेगा
मंजिल तो तेरे पास है
क्या तुझको इसका एहसास है

खुद को खुदी में खोज ले
तेरे खुशी को भी तेरी तलाश है

किस बात का कोई गम भला

जो खो गया वो मेरा नहीं
जो मिल गया
वो मेरा नसीब है

ये तो है ज़िन्दगी का फलसफा
कोई बिछड़ गया
कोई करीब है

किस बात का है गम भला
जो अपना है
अपनायेगा
जो गैर है वो
चला जायेगा

बुधवार, 25 मार्च 2020

दोस्ती


जाने क्यू कैसे मैं आज लिख रही हूँ,
वो तुमसे अपनी पहली मुलाकात लिख रही हूँ


            कुछ भूल गए कु छ याद रहा
मैं फिर से आज वही सारी बात लिख रही हूँ
जो थे, हैं और शायद हमेशा रहेगे
वो अनकहे अधूरे एहसास लिख रही हूं


            जो गुजर गया वो कभी लौट कर नही आता
उन गुजरे हुए लम्हो का मैं अब हिसाब लिख रही हूँ
कुछ तुमको कुछ खुद को मैं आज लिख रही हूँ


           जो कभी भी भूल कर भूलाया नही जाता
अपनी दोस्ती का वो जज़्बात लिख रही हु
नसीब हो तुम्हे मेरे हिस्से की भी हर खुशी
पता नही क्यूँ ये फरियाद लिख रही हूँ।